Loading Now

सिरसा टेला घाट पर पक्का पुल न होने से ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी, बाढ़ के बीच जान जोखिम में डालकर नाव से गंगा पार करने को मजबूर लोग

सिरसा टेला घाट पर पक्का पुल न होने से ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी, बाढ़ के बीच जान जोखिम में डालकर नाव से गंगा पार करने को मजबूर लोग

 

सहारा सन्देश टाइम्स

मेजा, प्रयागराज। मेजा क्षेत्र स्थित सिरसा, टेला घाट पर लंबे समय से पक्के पुल की मांग उठती रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं होने से क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। खासकर बरसात और बाढ़ के मौसम में गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद घाट पर आवागमन बेहद जोखिम भरा हो जाता है। इसके बावजूद रोजमर्रा की जरूरतों, रोजगार, व्यापार, शिक्षा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणों को नाव के सहारे गंगा पार करनी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सिरसा टेला घाट पर पक्का पुल बन जाने से मेजा क्षेत्र के कई गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। वर्तमान में गंगा पार करने के लिए नाव ही मुख्य साधन बनी हुई है। सामान्य दिनों में भी लोगों को नाव से आवागमन करना पड़ता है, लेकिन बाढ़ के दौरान तेज बहाव और बढ़े हुए जलस्तर के कारण स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। ऐसे समय में नाव से नदी पार करते हुए लोगों के मन में हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है।
बाढ़ के समय बढ़ जाता है खतरा
बरसात के दिनों में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही सिरसा टेला घाट पर नदी का बहाव तेज हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ के दौरान नाव से गंगा पार करना काफी कठिन हो जाता है। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को भी मजबूरी में नाव का सहारा लेना पड़ता है। कई बार खराब मौसम और तेज हवा के बीच लोगों को नदी पार करनी पड़ती है, जिससे उनके परिजन भी चिंतित रहते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गंगा पर पक्का पुल नहीं होने के कारण क्षेत्र का विकास भी प्रभावित हो रहा है। यदि पुल का निर्माण हो जाए तो आसपास के गांवों के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और मजदूरों को भी आने-जाने में काफी सहूलियत होगी।
कई बार अधिकारियों और सरकार को कराया गया अवगत
ग्रामीणों ने बताया कि सिरसा टेला घाट पर पक्का पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से मांग किए जाने के बावजूद अभी तक पुल निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे लोगों में निराशा के साथ-साथ आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उनका कहना है कि हर वर्ष बरसात में यही समस्या सामने आती है और अधिकारी स्थिति का जायजा लेते हैं, लेकिन बाढ़ का पानी कम होते ही समस्या फिर पीछे छूट जाती है। ग्रामीण अब चाहते हैं कि इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए और सिरसा टेला घाट पर पक्के पुल के निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।
स्थायी समाधान की मांग
क्षेत्रवासियों का कहना है कि नाव की व्यवस्था किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। बाढ़ और बरसात के समय नाव से आवागमन मजबूरी बन जाता है, जबकि पक्का पुल बनने से वर्षभर सुरक्षित आवागमन संभव हो सकेगा। ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि सिरसा टेला घाट का सर्वे कराकर पुल निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए और आवश्यक स्वीकृति प्रदान की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वे जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के समक्ष अपनी मांग को लेकर व्यापक स्तर पर आवाज उठाने को मजबूर होंगे। क्षेत्रवासियों ने शासन से अपील की है कि सिरसा टेला घाट पर पक्का पुल निर्माण की मांग को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द अनुमति और बजट की व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को बाढ़ के दौरान जान जोखिम में डालकर गंगा पार करने की मजबूरी से निजात मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की जरूरत है। अब देखना यह है कि वर्षों से चली आ रही इस मांग पर सरकार कब गंभीरता से कदम उठाती है।

Post Comment

मनोरंजन