चांदनी शाह बानो: राखी के पवित्र बंधन से जोड़ती हिंदू-मुस्लिम एकता की डोर, पीएम मोदी के साथ अनूठा रिश्ता
चांदनी शाह बानो: राखी के पवित्र बंधन से जोड़ती हिंदू-मुस्लिम एकता की डोर, पीएम मोदी के साथ अनूठा रिश्ता
सहारा सन्देश टाइम्स
नई दिल्ली/लखनऊ, 8 अगस्त 2025: रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही देश में एकता और सौहार्द की मिसाल कायम करने वाली एक अनूठी कहानी फिर से सुर्खियों में है। सूफी शाह मलंग (फकीर) समुदाय की समाजसेवी और वकील चांदनी शाह बानो हर साल की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए खास राखी तैयार कर रही हैं। इस साल उन्होंने भक्ति और परंपरा के प्रतीक ‘ॐ’ चिन्ह वाली राखी विशेष रूप से डिजाइन की है, जो उनके गहरे लगाव और देश के प्रति समर्पण को दर्शाती है। यह राखी न केवल एक धागा है, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है, जो अयोध्या के राम मंदिर विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों के बीच एक नई उम्मीद जगाती है।
चांदनी शाह बानो का परिचय
चांदनी शाह बानो का जन्म भगवान राम की नगरी अयोध्या में हुआ था। उनके पिता मुस्लिम अली दिल्ली में एक निजी कंपनी में कार्यरत थे, जिसके चलते उनकी शिक्षा और परवरिश भारत की राजधानी दिल्ली में हुई। ताहिर शाह से विवाह के बाद वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रह रही हैं। पेशे से वकील चांदनी समाजसेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर सूफी शाह मलंग (फकीर) समुदाय को एकजुट करने के लिए राष्ट्रीय शाह समाज फाउंडेशन इंडिया की स्थापना की, जिसकी वे प्रमुख हैं। इसके अलावा, वे मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सूफी शाह मलंग प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय सह-संयोजिका के रूप में भी महत्वपूर्ण दायित्व निभा रही हैं।
चांदनी ने विभिन्न गैर-राजनीतिक संगठनों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी समाजसेवा और समुदाय को जोड़ने की कोशिशों ने उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बनाया है।
राखी के बंधन की शुरुआत
चांदनी शाह बानो पिछले पांच वर्षों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राखी भेज रही हैं। यह परंपरा 2020 में उस समय शुरू हुई, जब अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन का ऐतिहासिक अवसर था। इस मौके पर चांदनी ने न केवल पीएम मोदी को राखी भेजी, बल्कि भगवान राम के लिए भी अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के नाम से राखी स्पीड पोस्ट की। यह कदम हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल थी।
उन्होंने बताया, “31 जुलाई 2020 को सुबह 11 बजे मैंने भगवान राम के लिए राम मंदिर ट्रस्ट के नाम से राखी भेजी थी। साथ ही, पीएम मोदी को भी राखी भेजी। यह मेरे लिए एक भावनात्मक और आध्यात्मिक क्षण था।” इस कदम ने न केवल उनके समुदाय बल्कि पूरे देश में सकारात्मक संदेश पहुंचाया। इसके बाद, हजारों मुस्लिम भाइयों और बहनों ने राम मंदिर निर्माण में आर्थिक सहयोग दिया और मंदिर बनने के बाद दर्शन भी किए।
RSS और इंद्रेश कुमार से प्रेरणा
चांदनी बताती हैं कि उनकी सोच में बदलाव तब आया, जब वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार के संपर्क में आईं। उनके मार्गदर्शन ने चांदनी और उनके समुदाय के मन में RSS और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रति बनी नकारात्मक धारणाओं को पूरी तरह बदल दिया। वे कहती हैं, “इंद्रेश जी के संपर्क में आने के बाद मुझे और मेरे समुदाय को यह समझ आया कि RSS और BJP के प्रति जो नकारात्मक छवि थी, वह पूरी तरह निराधार थी। आज हम हजारों बहनें हर साल पीएम मोदी की कलाई पर राखी बांधती हैं, और उन्होंने हमें अपनी बहन के रूप में स्वीकार किया है।”
पीएम मोदी के प्रति गहरा लगाव
चांदनी का पीएम मोदी के प्रति लगाव केवल राखी तक सीमित नहीं है। वे कहती हैं, “मैं प्रार्थना करती हूं कि आप देश के प्रधानमंत्री बने रहें और पूरी दुनिया पर राज करें। भारत ने अब दुनिया में अपना नाम बनाया है, और यह उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है।” हर साल रक्षाबंधन के मौके पर चांदनी कई राखियां खुद बनाती हैं और उनमें से सबसे खास राखी पीएम मोदी के लिए चुनती हैं। इस साल की राखी, जिसमें पवित्र ‘ॐ’ चिन्ह है, उनके विश्वास और परंपरा के प्रति सम्मान को दर्शाती है।
राम मंदिर और हिंदू-मुस्लिम एकता
अयोध्या का राम मंदिर विवाद 19वीं सताब्दी से चला आ रहा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद यह विवाद और गहरा गया, जिसने हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव को बढ़ाया। हालांकि, 2019 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। इस फैसले के बाद, 5 अगस्त 2020 को पीएम मोदी ने राम मंदिर का भूमि पूजन किया, जिसे देशभर में उत्साह के साथ देखा गया।
इस पृष्ठभूमि में चांदनी शाह बानो का राखी भेजने का कदम एक प्रतीकात्मक लेकिन शक्तिशाली संदेश है। यह न केवल धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर एकता की पहल कितनी प्रभावी हो सकती है। उनके इस प्रयास ने मुस्लिम समुदाय के एक बड़े वर्ग को राम मंदिर निर्माण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।
विश्लेषण: एकता का प्रतीक राखी
चांदनी शाह बानो की कहानी भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता में एकता की मिसाल है। रक्षाबंधन, जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है, उनके माध्यम से एक बड़े सामाजिक संदेश का हिस्सा बन गया है। अयोध्या जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उनकी पहल ने यह साबित किया कि प्रेम और विश्वास के छोटे-छोटे कदम बड़े बदलाव ला सकते हैं।
उनका यह कदम उस समय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जब देश में धार्मिक ध्रुवीकरण की चुनौतियां मौजूद हैं। पीएम मोदी ने भी अपने कार्यकाल में कई बार सौहार्द और समावेशिता की बात की है। उदाहरण के लिए, अजमेर शरीफ दरगाह में ‘चादर’ भेजने की उनकी परंपरा और सूफी संगीत जैसे आयोजनों को प्रोत्साहन देना इस दिशा में उनके प्रयासों को दर्शाता है। चांदनी का राखी भेजना इस संदेश को और मजबूत करता है कि भारत की ताकत उसकी विविधता और एकता में है।
निष्कर्ष
चांदनी शाह बानो की कहानी केवल एक राखी की कहानी नहीं है; यह एक ऐसी महिला की कहानी है, जो अपने समुदाय को एकजुट करते हुए, देश के सबसे संवेदनशील मुद्दों पर सकारात्मक संदेश दे रही है। उनका यह प्रयास न केवल हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि व्यक्तिगत स्तर पर उठाए गए कदम सामाजिक बदलाव की नींव रख सकते हैं। रक्षाबंधन 2025 के मौके पर उनकी राखी एक बार फिर पीएम मोदी की कलाई पर सजेगी, और इसके साथ ही देश में एकता और भाईचारे का संदेश भी गूंजेगा।



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