वन विभाग में वरिष्ठता पर भारी पड़ी अनदेखी, 38 साल की सेवा के बाद भी प्रमोशन से वंचित रेंजर बुद्धि वल्लभ नौडियाल
वन विभाग में वरिष्ठता पर भारी पड़ी अनदेखी, 38 साल की सेवा के बाद भी प्रमोशन से वंचित रेंजर बुद्धि वल्लभ नौडियाल
सहारा सन्देश टाइम्स
बरेली। उत्तर प्रदेश वन विभाग में पदोन्नति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला बरेली की सीबीगंज स्थित शाल रेंज में तैनात रेंजर बुद्धि वल्लभ नौडियाल का है, जो करीब 38 वर्षों की सेवा के बावजूद पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। उनका दावा है कि मौजूदा वरिष्ठता सूची में वह पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर हैं, इसके बावजूद उनका नाम प्रमोशन सूची में शामिल नहीं किया गया।
रेंजर बुद्धि वल्लभ नौडियाल ने वर्ष 1988 में वन विभाग में अपनी सेवा शुरू की थी। करीब 28 वर्षों तक विभाग में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने के बाद वर्ष 2016 में उन्हें रेंजर का चार्ज मिला। लंबी सेवा और वरिष्ठता के बावजूद आज भी वह सीबीगंज के शाल क्षेत्र में रेंजर के पद पर कार्यरत हैं।
नौडियाल का आरोप है कि विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया में वरिष्ठता को नजरअंदाज किया गया है। उनका कहना है कि उनसे दो बैच जूनियर रेंजरों को पदोन्नति देकर सीधे एसडीओ बना दिया गया, जबकि प्रदेश की वरिष्ठता सूची में उनका स्थान सबसे ऊपर है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर उनकी पदोन्नति का रास्ता क्यों नहीं खुल रहा है।
38 वर्षों तक जंगलों और वन संपदा की सुरक्षा में अपनी सेवाएं देने वाले नौडियाल अब अपने ही विभाग में अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लंबे समय तक खामोश रहने के बाद उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
इस मामले ने वन विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया और वरिष्ठता के आधार पर लिए जाने वाले फैसलों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यदि वरिष्ठता सूची में प्रथम स्थान पर होने के बावजूद किसी अधिकारी की पदोन्नति नहीं होती, तो इसके पीछे विभागीय नियमों और प्रक्रिया की पारदर्शिता स्पष्ट होना जरूरी है।
अब निगाहें लखनऊ में बैठे वन विभाग के आला अधिकारियों पर टिकी हैं। क्या विभाग रेंजर बुद्धि वल्लभ नौडियाल की शिकायत पर निष्पक्ष जांच कर उन्हें उनका अधिकार दिलाएगा, या 38 वर्षों की सेवा के बाद भी उनकी पदोन्नति का इंतजार यूं ही जारी रहेगा।
फिलहाल, इस पूरे मामले में वन विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।



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