दूसरों की दावत पर नजर, अपने पुराने किस्सों पर पर्दा! मंडी में आरोप लगाने वालों की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं,इरफान अंसारी
दूसरों की दावत पर नजर, अपने पुराने किस्सों पर पर्दा! मंडी में आरोप लगाने वालों की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं,इरफान अंसारी
नजीबाबाद मीडिया पर उंगली उठाने वालों से व्यापारियों का सवाल—पहले अपना हिसाब-किताब तो देख लीजिए जनाब,इरफान अंसारी
सहारा सन्देश टाइम्स
नजीबाबाद। कहते हैं कि दूसरों की थाली में झांकने वालों को कभी-कभी अपनी थाली का हिसाब भी देना पड़ जाता है। एक कॉलोनी में मीडिया कर्मियों पर कथित तौर पर बिन बुलाए दावत उड़ाने के आरोप लगाने का मामला अब कुछ ऐसा ही दिलचस्प मोड़ लेता हुआ नजर आ रहा है। मीडिया को कटघरे में खड़ा करने निकले कुछ लोगों के पुराने किस्सों की चर्चा शुरू हुई, तो मंडी की फिजाओं में सवाल तैरने लगे—जनाब, आरोप लगाने से पहले अपना इतिहास भी खंगाल लिया होता!
मौसमी के मंडी व्यापारी शाहनवाज ने आरोप लगाने वालों पर तंज कसते हुए कहा कि दूसरों को दावत के शिष्टाचार का पाठ पढ़ाने वालों को पहले खुद भी आईना देख लेना चाहिए। उनका दावा है कि कुछ लोग मंडी में आयोजित दावतों में बिना बुलाए पहुंचकर भोजन करने के बावजूद दूसरों पर सवाल उठाते हैं। शाहनवाज ने एक पुराने घटना का जिक्र करते हुए यह भी दावा किया कि एक व्यापारी की दुकान पर आयोजित दावत के दौरान दो थैलियों में मांस ले जाने की बात भी अब मंडी में खूब घूम रही है। मांस चोरी करने वाला अगर दूसरों पर कीचड़ उछाले तो अच्छा नहीं है।
अब सवाल यह है कि दावत में कौन बुलाया गया था और कौन अपनी मर्जी से मेहमान बन बैठा, इसका फैसला तथ्यों से होगा या आरोपों की आवाज से? फिलहाल मंडी में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
दावत के आयोजक ने खोला अपना पक्ष
मंडी व्यापारी वसीम राईन ने बताया कि वह कॉलोनी में पार्टनर हैं और मीडिया कर्मियों के लिए दावत का आयोजन भी उन्हीं की ओर से किया गया था। उनके मुताबिक, कार्यक्रम में करीब 30 लोगों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन मौके पर केवल सात-आठ लोग ही पहुंच सके।
वसीम राईन ने गलत जानकारी फैलाने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति या मीडिया कर्मी पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पुष्टि कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उनके संज्ञान में झूठी और गलत सूचना फैलाने का मामला सामने आता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
व्यंग्य की चुटकी, सवालों की पूरी थाली!
मंडी में अब चर्चा सिर्फ दावत की नहीं, बल्कि उसूलों की भी है। आखिर दूसरों के खाने का हिसाब रखने वाले अपने पुराने व्यवहार का हिसाब देने से क्यों बचें? अगर किसी ने दावत में बुलाया है, तो खाना मेजबानी है; और अगर किसी ने बिना बुलाए पहुंचने का आरोप लगाया है, तो उसका जवाब भी प्रमाण से ही मिलना चाहिए।
क्यों जनाब! दूसरों की प्लेट में कितनी पूरियां थीं, यह गिनना आसान है; लेकिन अपने पुराने किस्सों की गिनती शुरू हो जाए, तो हिसाब लंबा भी निकल सकता है!
फिलहाल कॉलोनी की इस दावत-कथा में आरोप भी हैं, सफाई भी और तंज भी। सच क्या है, यह संबंधित तथ्यों की पुष्टि से ही सामने आएगा। लेकिन एक बात तय है—दूसरों पर कीचड़ उछालने से पहले यह देख लेना चाहिए कि अपने हाथ साफ हैं या नहीं।



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