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दैनिक सहारा संदेश टाइम्स इस दिवाली जरूरतमंद बच्चों के जीवन में खुशियों की रोशनी लाने की अपील — सम्पादक फुरकान अली

दैनिक सहारा संदेश टाइम्स
इस दिवाली जरूरतमंद बच्चों के जीवन में खुशियों की रोशनी लाने की अपील — सम्पादक फुरकान अली

जनहित एवं सामाजिक सेवा

दीपावली के पावन अवसर पर दैनिक सहारा संदेश टाइम्स की ओर से समाजसेवियों, व्यापारियों, दानदाताओं, सामाजिक संस्थाओं एवं आम नागरिकों से जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की दिवाली खुशहाल बनाने के लिए भावपूर्ण अपील की गई है।
संपादक फुरकान अली ने कहा कि दीपावली केवल दीप जलाने और मिठाइयाँ बाँटने का त्योहार नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक खुशियाँ पहुँचाने और मानवता का संदेश फैलाने का अवसर भी है। आज भी अनेक ऐसे परिवार हैं, जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण अपने बच्चों के लिए नए कपड़े, मिठाइयाँ और त्योहार की आवश्यक सामग्री नहीं जुटा पाते।
उन्होंने कहा कि गरीब बच्चों की भी इच्छा होती है कि वे दूसरे बच्चों की तरह नए कपड़े पहनें, मिठाइयाँ खाएँ और दीपावली की खुशियाँ मनाएँ। ऐसे में समाज के सक्षम लोगों का छोटा-सा सहयोग उनके चेहरों पर मुस्कान ला सकता है और उनके त्योहार को यादगार बना सकता है।
फुरकान अली ने नागरिकों से अपील की कि वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद बच्चों के लिए नए कपड़े, मिठाइयाँ, फल एवं छोटे-छोटे उपहार उपलब्ध कराने में सहयोग करें। इस पहल का उद्देश्य समाज में आपसी भाईचारे, संवेदनशीलता और सेवा भावना को बढ़ावा देना है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों तक त्योहार की खुशियाँ पहुँच सकें।
उन्होंने कहा, “हमारा प्रयास होना चाहिए कि कोई भी बच्चा आर्थिक मजबूरी के कारण दीपावली की खुशियों से वंचित महसूस न करे। किसी जरूरतमंद बच्चे को दिया गया एक जोड़ा नया कपड़ा या मिठाई का एक डिब्बा भी उसके लिए बड़ी खुशी बन सकता है।”
दैनिक समाचार पत्र सहारा संदेश टाइम्स ने सभी नागरिकों से इस सामाजिक पहल में अपनी क्षमता के अनुसार भाग लेने तथा जरूरतमंद बच्चों की गरिमा और सम्मान का ध्यान रखते हुए सहयोग करने का अनुरोध किया है।
संदेश: हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान, हर घर में खुशियों की रोशनी।

प्रेस संपर्क विवरण
दैनिक समाचार पत्र सहारा संदेश टाइम्स
संपादक: फुरकान अली
मोबाइल नंबर: 8826476293

बैंक संबंधी जानकारी: सहयोग के इच्छुक व्यक्ति बैंक विवरण के लिए दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

जनसेवा ही सच्ची मानवता है। आइए, इस दिवाली खुशियाँ बाँटें और जरूरतमंद बच्चों के जीवन में उम्मीद की रोशनी जगाएँ।

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