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स्वदेशी और स्वावलंबन के प्रतीक: जमनालाल बजाज जी की जयंती पर विशेष श्रद्धांजलि

स्वदेशी और स्वावलंबन के प्रतीक: जमनालाल बजाज जी की जयंती पर विशेष श्रद्धांजलि

सहारा सन्देश टाइम्स

​नई दिल्ली। भारत के अग्रणी उद्योगपति, समाजसेवी और स्वतंत्रता सेनानी सेठ जमनालाल बजाज जी की जयंती पर देश उन्हें कोटि-कोटि नमन करता है। राष्ट्रनिर्माण, स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक समानता के लिए उनका अतुलनीय योगदान आज भी सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है।
​महात्मा गांधी के ‘पांचवें पुत्र’ और सादगी की मिसाल
जमनालाल बजाज जी का जीवन त्याग, नैतिकता और निस्वार्थ सेवा का अद्वितीय उदाहरण रहा है। महात्मा गांधी के विचारों से गहराई से प्रभावित होकर उन्होंने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी निभाई, बल्कि गांधी जी उन्हें अपना ‘पांचवां पुत्र’ भी मानते थे।
​उपाधि का त्याग: स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने अंग्रेजों द्वारा दी गई ‘राय बहादुर’ की उपाधि को त्याग कर देशभक्ति का अनूठा परिचय दिया।
​सामाजिक क्रांति की पहल: 1928 में उन्होंने वर्धा स्थित अपने पारिवारिक श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के द्वार सभी वर्गों और दलितों के लिए खोल दिए, जो उस दौर में सामाजिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था।
​खादी और ग्रामोद्योग: देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने खादी के प्रचार-प्रसार और कुटीर उद्योगों को मजबूत करने में अपना जीवन समर्पित कर दिया।
​प्रेरणादायी व्यक्तित्व को नमन
जमनालाल बजाज जी के आदर्श, देशभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना अमर है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को सदैव सत्य, सादगी और राष्ट्रसेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।

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