मेजा में बांग्लादेशी नागरिकता के आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी मामले में पुलिस पर कार्रवाई, थाना प्रभारी व विवेचक निलंबित
मेजा में बांग्लादेशी नागरिकता के आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी मामले में पुलिस पर कार्रवाई, थाना प्रभारी व विवेचक निलंबित
सहारा सन्देश टाइम्स
मेजा,प्रयागराज । मेजा थाना क्षेत्र के सोनार का तारा, ऊंचडीह में लंबे समय से क्लीनिक संचालित कर रहे डॉ. कमलेश विश्वास उर्फ सुजल की गिरफ्तारी का मामला अब पुलिस विभाग के अधिकारियों की कार्रवाई के बाद चर्चा में आ गया है। डॉक्टर के खिलाफ फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल तथा नागरिकता से जुड़े आरोपों की जांच के बाद पुलिस ने उन्हें जेल भेजा था। इसके बाद गिरफ्तारी की प्रक्रिया और थाने में रखे जाने की अवधि को लेकर गंभीर सवाल उठे और मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया।
मिली जानकारी के अनुसार डॉ. कमलेश विश्वास उर्फ सुजल काफी समय से मेजा के सोनार का तारा ऊंचडीह में क्लीनिक चलाकर मरीजों का इलाज कर रहे थे। पुलिस की जांच में उनके दस्तावेजों और नागरिकता को लेकर सवाल सामने आए। पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान उनके पास अलग-अलग नामों से बने आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज मिले। पुलिस ने यह भी दावा किया कि उनके पास मौजूद दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बना था, जबकि वीजा को लेकर भी सवाल सामने आए।
पुलिस ने मामले की जांच के बाद डॉक्टर के खिलाफ फर्जी दस्तावेज और कूटरचित कागजात सहित विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की। इसके साथ ही उनके बांग्लादेशी नागरिक होने और भारतीय नागरिकता से जुड़े तथ्यों की भी जांच की गई। पूर्व में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार यह कार्रवाई रामनगर बाजार निवासी गीता विश्वास की शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी।
गिरफ्तारी की तारीख को लेकर उठे सवाल
मामले में सबसे महत्वपूर्ण विवाद डॉक्टर को थाने लाए जाने और उनकी गिरफ्तारी दिखाए जाने के बीच के अंतर को लेकर सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर को 15 अगस्त 2026 को पुलिस ने पकड़ा था, जबकि उनकी गिरफ्तारी 19 अगस्त को दर्शाई गई। मामले की जांच के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज के बाद इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठे।
डॉक्टर के पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्हें कई दिनों तक थाने में रखा गया और लॉकअप में प्रताड़ित किया गया। इन आरोपों की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। इसके बाद न्यायालय की ओर से राज्य सरकार और पुलिस से जवाब मांगा गया।
हाईकोर्ट में याचिका के बाद हुई विभागीय जांच
मामला न्यायालय पहुंचने के बाद पुलिस अधिकारियों ने भी पूरे घटनाक्रम की जांच कराई। जांच एसीपी स्तर के अधिकारी से कराई गई। जांच रिपोर्ट में तत्कालीन मेजा थाना प्रभारी जितेंद्र/नितेंद्र कुमार शुक्ला तथा मामले के विवेचक कमलेश यादव की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाई गई। इसके बाद पुलिस आयुक्त के आदेश पर दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। उपलब्ध रिपोर्ट में डीसीपी यमुनापार विवेक चंद्र यादव द्वारा निलंबन की पुष्टि की गई है।
पुलिस विभाग की इस कार्रवाई के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। एक ओर पुलिस ने डॉक्टर के खिलाफ दस्तावेजों और नागरिकता से जुड़े आरोपों के आधार पर कार्रवाई की थी, वहीं दूसरी ओर गिरफ्तारी की प्रक्रिया और थाने में रखे जाने को लेकर हुई विभागीय जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं।
अब जांच के निष्कर्ष पर टिकी निगाहें
डॉ. कमलेश विश्वास उर्फ सुजल के खिलाफ लगाए गए फर्जी दस्तावेज, कूटरचना और नागरिकता संबंधी आरोपों का अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगा। वहीं पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद विभागीय स्तर पर भी आगे की कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।
मामले ने मेजा क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका और उसके बाद हुई पुलिस विभाग की जांच ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि न्यायालय और विभागीय जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं तथा डॉक्टर और संबंधित पुलिसकर्मियों के मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।



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