हाथी पर सवार होकर आएंगी माता, आर्थिक बदलाव के संकेत
हाथी पर सवार होकर आएंगी माता, आर्थिक बदलाव के संकेत
नवरात्र में बनेंगे 5 शुभयोग, चित्रा नक्षत्र में होगी घट स्थापना; 18 और 19 को अष्टमी
सहारा सन्देश टाइम्स
उज्जैन। शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होंगे और 20 अक्टूबर तक चलेंगे। इस बार किसी भी तिथि का क्षय नहीं होने से नवरात्र पूरे 9 दिन के रहेंगे। रविवार को चित्रा नक्षत्र में घट स्थापना होगी। श्रीमद् देवी भागवत के अनुसार रविवार को नवरात्र शुरू होने पर देवी का वाहन हाथी माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता में हाथीपर माता का आगमन सुख-समृद्धि, आर्थिक प्रगति और सकारात्मक बदलाव का संकेत माना जाता है।
पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार इस बार नवरात्र में एक अमृत सिद्धि योग, दो सर्वार्थ सिद्धि योग और दो रवि योग बनेंगे। इन योगों में साधना-उपासना के साथ भूमि, भवन, वाहन और अन्य शुभ कार्य करना महत्वपूर्ण माना गया है।
पंडित डिब्बेवाला के अनुसार माता के हाथी पर आगमन को आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वित्तीय व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और न्याय व्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में समय के साथ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित व्याख्या है।
सर्वार्थ सिद्धि योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। इस दौरान नया व्यापार, नौकरी, प्रोजेक्ट या अन्य काम शुरू करने के साथ भूमि, मकान, वाहन, सोने-चांदी के आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने
की परंपरा है।
अमृत सिद्धि योग में भी शुभ कार्यों का विशेष महत्व माना गया है। इस दौरान बड़ी डील, बिजनेस कॉन्ट्रैक्ट, नौकरी से जुड़े प्रयास और आजीविका से संबंधित यात्रा करना शुभ माना जाता है।
अष्टमी 18 और 19 अक्टूबर को
पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8:27 बजे शुरू होगी और 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे तक रहेगी। जिन घरों में रात में पूजन की परंपरा है, वहां 18 अक्टूबर की शाम 3 से 5 बजे के बीच पारंपरिक पूजन किया जा सकता है। सुबह पूजन करने वाले श्रद्धालु 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे से पहले अष्टमी पूजन कर सकते हैं।
19 अक्टूबर को कन्या पूजन, इसके बाद अभिजीत मुहूर्त
कन्या पूजन के लिए 19 अक्टूबर को सूर्योदय से सुबह 10:51 बजे तक का समय बताया गया है। यदि इस अवधि में कन्या पूजन नहीं हो पाए तो दोपहर 11:43 से 12:30 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में कन्या भोज कराया जा सकता है। इस समय तक नवमी तिथि शुरू हो चुकी होगी, लेकिन शास्त्रीय मान्यता में अभिजीत मुहूर्त को शुभ माना गया है।
20 अक्टूबर को दशहरा
नवमी तिथि 19 अक्टूबर को दोपहर करीब 12 बजे शुरू होकर 20 अक्टूबर को सुबह करीब 10 बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि शुरू होगी। इसलिए इस बार 20 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा।
उज्जैन में साधना का विशेष महत्व पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार उज्जैन को तंत्र साधना की भूमि माना जाता है। यहां वैदिक साधना का भी विशेष महत्व है। कुल परंपरा या गुरु परंपरा के अनुसार की जाने वाली साधना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति की मान्यता है। घट स्थापना के शुभ मुहूर्त
प्रातः 8:00 से 9:30 चंचल
9:30 से 11:00 लाभ
11:00 से 12:30 अमृत
11:50 से 12:40 अभिजित
दोपहर 2:00 से 3:30 शुभ



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