बिजनौर बार एसोसिएशन की मजबूती और अधिवक्ताओं के सम्मान का संदेश, मध्यस्थता से विवाद का समाधान सराहनीय
बिजनौर बार एसोसिएशन की मजबूती और अधिवक्ताओं के सम्मान का संदेश, मध्यस्थता से विवाद का समाधान सराहनीय
सहारा सन्देश टाइम्स
बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश कुमार और अधिवक्ताओं के बीच उत्पन्न विवाद में पुलिस अधीक्षक के.के. बिश्नोई की भूमिका तथा जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह द्वारा सोच-समझकर मध्यस्थता के माध्यम से समाधान की दिशा में उठाया गया कदम सराहनीय है। इस पहल ने एक बार फिर साबित किया है कि मजबूत बार एसोसिएशन संवाद, विवेक और संवैधानिक मर्यादाओं के साथ अपने सदस्यों के सम्मान एवं अधिकारों की रक्षा कर सकती है।
इस पूरे प्रकरण पर एनडीए गठबंधन के घटक दल अपना दल (एस) के जिलाध्यक्ष एडवोकेट शैलेंद्र चौधरी ने कहा कि अधिवक्ता समाज का केवल एक पेशा नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है। अधिवक्ता अपने मुवक्किल का पक्ष रखने, उसकी बात संबंधित अधिकारी तक पहुंचाने और न्याय के लिए प्रत्येक वैधानिक मंच पर जाने का पूर्ण अधिकार रखता है। किसी भी अधिवक्ता द्वारा अपने क्लाइंट की ओर से तथ्य प्रस्तुत करना या किसी अधिकारी से मिलना अपने आप में अनुचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों का सम्मान और अधिवक्ताओं की गरिमा, दोनों लोकतांत्रिक व्यवस्था के अभिन्न अंग हैं। किसी भी विवाद में व्यक्तिगत अहंकार के बजाय कानून, संवाद और संवैधानिक मर्यादाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे निष्पक्षता से तथ्यों को देखें और किसी भी पक्ष के अधिकारों का हनन न होने दें।
शैलेंद्र चौधरी ने कहा कि न्यायपालिका ने भी अपने विभिन्न निर्णयों में अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता, न्यायालय के समक्ष निर्भीक होकर पक्ष रखने और न्यायिक प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया है। अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा हैं और उनकी पेशेवर स्वतंत्रता की रक्षा होना आवश्यक है। साथ ही यह स्वतंत्रता कानून, न्यायालय की गरिमा और पेशेवर आचरण की सीमाओं के अनुरूप होनी चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि अधिवक्ता को अपने मुवक्किल की बात कहने से रोकना न्याय तक पहुंच के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। प्रत्येक नागरिक को अपनी समस्या लेकर संबंधित अधिकारी के समक्ष जाने और कानून के दायरे में अपना पक्ष रखने का अधिकार है। अधिकारी जनता की सेवा और कानून के पालन के लिए नियुक्त होते हैं, इसलिए संवाद के रास्ते हमेशा खुले रहने चाहिए।
जिलाध्यक्ष ने जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह की मध्यस्थता की पहल की सराहना करते हुए कहा कि बिजनौर बार की मजबूती केवल संगठन की संख्या से नहीं, बल्कि उसकी एकजुटता, विधिक समझ, अनुशासन और अधिवक्ताओं के सम्मान की रक्षा करने की क्षमता से तय होती है।
उन्होंने कहा कि विवाद किसी भी पक्ष के सम्मान को ठेस पहुंचाए बिना समाप्त होना चाहिए। न प्रशासन को अधिवक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी करनी चाहिए और न ही किसी को कानून से ऊपर समझना चाहिए। कानून सर्वोपरि है और संवाद ही लोकतांत्रिक समाधान का सबसे मजबूत रास्ता है।
अंत में उन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और बार एसोसिएशन आपसी समन्वय बनाए रखते हुए भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचेंगे, जिससे बिजनौर की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था की गरिमा बनी

Post Comment