माता के श्राद्ध पर शैलेंद्र चौधरी ने किया विधि-विधान से पूजन, पूर्वजों के संस्कारों को बताया जीवन की अमूल्य धरोहर
माता के श्राद्ध पर शैलेंद्र चौधरी ने किया विधि-विधान से पूजन, पूर्वजों के संस्कारों को बताया जीवन की अमूल्य धरोहर
सहारा सन्देश टाइम्स
बिजनौर । भारतीय संस्कृति में माता-पिता और पूर्वजों का स्थान सर्वोपरि है। उनके प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए अपना दल (एस) के बिजनौर जिलाध्यक्ष एवं एडवोकेट शैलेंद्र चौधरी ने आज अपनी पूजनीय माता के श्राद्ध के अवसर पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर शैलेंद्र चौधरी ने कहा कि माता केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि जीवन में संस्कार, त्याग, ममता और सेवा का प्रथम पाठ पढ़ाने वाली गुरु होती हैं। मां के दिए संस्कार जीवनभर मनुष्य का मार्गदर्शन करते हैं। उनका आशीर्वाद और उनके द्वारा दिए गए जीवन-मूल्य संतान की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में श्राद्ध केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अपने माता-पिता और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पवित्र अवसर है। यह हमें याद दिलाता है कि आज हम जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे हमारे माता-पिता का त्याग, परिश्रम और पूर्वजों के संस्कारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। शैलेंद्र चौधरी ने कहा कि आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच हमें अपनी संस्कृति, परंपराओं और पारिवारिक मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए। पूर्वजों का सच्चा सम्मान केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने, जरूरतमंदों की सहायता करने, परिवार में संस्कार बनाए रखने और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने में भी निहित है। उन्होंने भावुक संदेश देते हुए कहा कि “माता-पिता का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता। उनके दिए संस्कार ही जीवन की असली पूंजी हैं। पूर्वजों का सम्मान करना हमारी संस्कृति है और उनके आदर्शों को अपने आचरण में उतारना हमारा कर्तव्य। श्राद्ध के इस पावन अवसर पर उन्होंने अपनी माता की स्मृतियों को नमन करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और सद्भाव की कामना की। यह अवसर मातृऋण, पारिवारिक संस्कारों और सनातन परंपराओं के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक बना।


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